Tuesday, March 11, 2008

हीम्मत करने वालों की हार नही होती॥ ( हरीबंश राय बचन )

लहरों से डर कर नौका पार नही होती ,
हीम्मत करने वालों की हार नही होती॥

नन्ही चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर सौ बार फींसलती है,
मॅन का वीश्वास रगों में साहस बँटा है ,
चढ़ कर गीरना , गीर कर चढ़ना न अखरता है,
आखीर उसकी म्हणत बेकार नही होती ,
हीम्मत करने वालों की हार नही होती ॥

डुबकीयां सीँधु में गोताखोर लगाता है,
जा कर खाली हाथ लौट आता है ,
मीलते न सहज ही मोती ,
पानी में बहता दुगना उत्साह इस्सी हैरानी में ,
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नही होती ,
हीम्मत करने वालों की हार नही होती॥

असफलता एक चुनौती है स्वीकार करो ,
क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो,
जब तक न सफल हो नींद चैन की त्यागो तुम,
संघर्षों का मैदान छोड़ मत भागो तुम ,
कुछ कीए बीना ही जय जय कार नही होती ,
हीम्मत करने वालों की हार नही होती॥




मेरी इन नीगाहों मैं सीर्फ तेरे इंतजार की परछाई है॥

बस एक तेरे साथ की प्यासी मेरी हर तन्हाई है,
मेरी इन नीगाहों मैं सीर्फ तेरे इंतजार की परछाई है॥

चांदनी कहाँ मीलती है, वह भी अंधेरो मैं समाई है,
रौशनी के लीए हमने ख़ुद अपनी ही आखें जलाई हैं॥

करवट करवट रात ने हर तरफ़ उदासी फैलाई है,
ऐसे मैं न जीन्दगी करीब है ,न हमे मौत ही आती है॥

तेरे प्यार की तलब ही इश दील की गहराई है,
हमने आंसुओं के सैलाब मैं हर आस बहाई है॥

हवा की सरसराहट से भी लगे तेरी ही आहट आई है,
इश एक उम्मीद मैं जाने हमने कीतनी सदीयाँ बीतायी हैं॥ ॥

वो पूछते हैं मुझसे कीस हद तक प्यार है......

वो पूछते हैं मुझसे कीस हद तक प्यार है,
मैंने कहा जहाँ तक ये अनंत नीला आकाश है,

वो पूछते हैं कीसका तुम्हारे दील पे इख्तीयार है ,
मैने कहा जीसका प्यार् मेरे दील मै बेसुमार है,

वो पूछते हैं कीस तोहफे का तुमको इन्तजार है ,
मैंने कहा आपका तसुब्ब्र्र जीसके लीए मेरा दील बेकरार है,

वो पूछते है मेरा साथ कहाँ तक नीभाना है ,
मैंने कहा जहाँ तक चमकते सीतारों का संसार है,

वो पूछते है , मैं कीस तरह ऐतबार करू तुम पर ?
मैंने कहा मेरा वजूद ख़ुद मे एक ऐतबार है…!